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विज्ञान की सेवा में समर्पित १७ साल प्रारंभ से लेकर अबतक परियोजना और प्रगतिशील उपलब्धियों का विवरण

 

वर्ष महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ
१९९३-१९९४१९९४-१९९५१९९५-१९९६१९९६-१९९७१९९७-१९९८१९९८-१९९९१९९९-२०००२०००-२००१२००१-२००२२००२-२००३२००३-२००४२००४-२००५२००५-२००६२००६-२००७२००७-२००८२००८-२००९२००९-२०१०२०१०-२०११२०११-२०१२२०१२-२०१३२०१३-२०१४२०१४-२०१५
  • जनवरी, १९९४ को विज्ञान नगरी के विकास के लिए एक नए उद्यम की शुरुआत हेतु ४९.६ एकड़ ज़मीन को चिन्हित किया गया । इस में से ३० एकड़ ज़मीन साइंस सिटी को कलकत्ता नगर निगम (सी एम सी) द्वारा भेंट दी गई और शेष १९.६ एकड़ ज़मीन सी एम सी से दीर्घ अवधी के पट्टेपर मिली ।
  • साइंस सिटी मास्टर प्लान के वास्तु मॉडल को मे. डेवेलपमेंट कन्सल्टेन्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार किया गया था, जिसे राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् ने प्राथमिक सलाहकार नियुक्त किया था।
  • सेमिनार हॉल का निर्माण कार्य पूरा हुआ और कन्वेन्शनसेन्टर कॉम्पलेक्स के मुख्य तथा छोटे ऑडिटोरियम अपनी तय समय सीमा पर ही बन रहे थे ।
  • परिषद् ने स्पेस थियेटर, डायनामोशन हॉल और आउटडोर विज्ञान (साइंस) पार्क के निर्माण और प्रदर्शन विकास का कार्य शुरू किया।
  • कन्वेन्शन सेन्टर कॉम्पलेक्स का प्रधान निर्माण कार्य पूरा हो गया। स्पेस ओडिसी और डायनामोशन हॉल की इमारतों का निर्माण कार्य समय से पहले पूरा कर लिया गया।
  • उद्यान के विकास के साथ – साथ पूरे परिसर के विकास के कार्य की शुरुआत हुई ।
  • जून महीने में साइंस सिटी में “डायनासोरस अलाइव” नाम से एक प्रदर्शनी लगाई गई ।
  • ४५ दिनों तक चली इस प्रदर्शनी को देखने काफ़ी बड़ी संख्या में लोग आए।
  • २१ दिसम्बर, १९८६ को कन्वेन्शन सेन्टर कॉम्पलेक्स का उद्घाटन १९९५ में रसायनके नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात पर्यावरण वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर पॉल जे. क्रूत्ज़ेन के द्वारा हुआ ।
  • विज्ञान नगरी के सभी प्रधान निर्माणकार्य पूर्ण हो गए।
  • कलकत्ता में पहली बार विशाल फ़ॉर्मेट वाली पैनहेमिस्फेरिक मूवी – “द सिटी ऑफ़ हारमनी” विज्ञान नगरी द्वारा बनाई गई, जिस में तकनीकी सहायता जापान के मे. गोटोइन्क. की थी । भारत में बनी हुई यह पहली पैनहेमिस्फेरिक मूवी थी।
  • १ जुलाई, १९९७ को भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री श्री इन्द्र कुमार गुजराल के करकमलों द्वारा विज्ञान नगरी का उद्घाटन हुआ । पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री के. व्ही. रघुनाथ रेड्डी, मुख्यमंत्री श्री ज्योति बसु एवं भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री श्री एस. आर. बोम्मई भी इस समारोह में उपस्थित थे ।

दर्शकों के लिए निम्न लिखित सुविधाएँ उपलब्ध करा दी गईं

  1. ३६० सीटों वाला अर्धगोलाकार, झुकाहुआ, गुंबदनुमा – स्पेस थियेटर, जो एस्ट्रोव्हीज़न ७० और एच एस एस हेलिअस प्लैनेटरियम सिस्टम से लैस था।
  2. टाईम मशीन।
  3. अंतरिक्ष संबधी प्रदर्शनी।
  4. भौतिक और जीव विज्ञान से संबधित प्रदर्शनी – डायनामोशन।
  5. जीव विज्ञान कॉर्नर।
  6. कैक्टस कॉर्नर।
  7. तितली उद्यान।
  8. म्यूज़िकल फ़ाउन्टेन।
  9. कॉन्वेन्शन सेन्टर कॉम्पलेक्स।
  10. पिकनिक एरिया।
  11. विज्ञान (साइंस) पार्क।
  12. रोड ट्रेन।
  13. कैटरपिलर।

उद्घाटन से लेकर मार्च, १९९८ तक साइंस सिटी में आनेवाले दर्शकों की संख्या १२,४४,४९० दर्ज़ की गई।

  • सार्वजनिक – निजी भागीदारी के मॉडल के आधार पर एक १८ मीटर ऊँचे और ४०० मीटर लंबे, पल्स्डपावर रोप वे बनाया गया ।
  • ख़ास तौर पर स्कूली बच्चों के लिए विकसित किट्स और जीवित नमूनों के साथ एक क्षेत्र बनाया गया, जहाँ नन्हें-मुन्ने बच्चे मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धन भी कर सकें ।
  • निम्न लिखित शो आयोजित किए गए
    1. डॉग शो
    2. फ़्लावर शो
    3. कैक्टस शो
  • द्वितीय साइंस सेंटर वर्ल्ड कॉंग्रेस का आयोजन ११ से १५ जनवरी १९९९ तक विज्ञान नगरी के कन्वेन्शन सेंटर कॉम्पलेक्स में हुआ।
  • दिनके कुछ निर्दिष्ट समय पर दर्शकों के लिए गाईड के साथ डायनामोशन, साइंस पार्क, और डायनासोर एन्क्लेव घूमने की व्यवस्था की गई

इस वर्ष १८,७२,६५४ दर्शक विज्ञान नगरी घूमने आए ।

  • विज्ञान नगरी, कलकत्ता में एक सामुद्रिक संग्रहालय (मैरिटाईम म्यूज़ियम) के निर्माण के लिए कलकत्ता पोर्ट ट्रस्ट (कलकत्ता पत्तन न्यास) के साथ सहमति पत्र पर दस्तखत किए गए ।
  • इवोल्यूशनपार्क : थीमटूअर के नाम एक नई परियोजना की प्रारंभिक परिकल्पना की गई।
  • ७ सितम्बर, २००० को विज्ञान नगरी के पार्क एरिया में मोनोरेल सायकल की शुरुआत हुई।
  • बटरफ़्लाई एन्क्लेव : इस साल डायनामोशन हॉल में तितलियों के लिए एक नया अहाता विकसित किया गया । इस क्षेत्र को तितलियों की प्रजनन प्रक्रिया के अनुकूल बनाने के लिए कृत्रिम रूप से तापमान और नमी को नियंत्रित किया गया।
  • “एवोल्यूशन पार्क: थीमटूअर” के नाम से शुरू की गई नई परियोजना को विकसित करने का कार्य इस साल भी जारी रहा।
  • “एवोल्यूशन पार्क: थीमटूअर” २८ दिसंबर २००१ से जनसाधारण के लिए उपलब्ध हो गया।
  • १५ एवं १६ दिसंबर २००१ को कोलकाता कै नाइन क्लब के सहयोग से डॉग शो का आयोजन किया गया।
  • २ फ़रवरी २००२ को “ग्रैविटीकोस्टर” की शुरु आत हुई ।
  • इस साल “स्पेस एक्स्प्लोरेशन थ्रू एनआर्टिस्टआई” (नासा) विषय पर एक दस पैनलों वाली प्रदर्शनी को विकसित और पेश किया गया।
  • १५ एवं १६ दिसंबर २००२ को कोलकाता कै नाइन क्लब के सहयोग से डॉग शो का आयोजन किया गया।
  • २३ अक्तूबर, २००३ को विज्ञान, तकनीक और पर्यावरण पर विशेष रूप से बनाई फ़िल्मों को दिखाने की विशेष सुविधा वाले “थ्रीडी थियेटर” का आरंभ हुआ, जिस में दर्शकों को त्रि-आयामी प्रभाव वाली तस्वीरें दिखती हैं।
  • १७ अक्तूबर, २००३ को कोलकाता न्यास के सहयोग से बने मैरिटाइम सेन्टर का उद्घाटन हुआ । यह प्रदर्शनी सामुद्रिक इतिहास, समुद्री जहाज़ों और नौ-परिबहन पर आधारित है।
  • मौजूदा प्रदर्शनियों को उन्नत बनाने के उद्यम के तहत डायनमोशन और स्पेस ओडिसी के लिए नए प्रदर्शनों के विकास का कार्य शुरू हुआ ।
  • शीशों पर आधारित एक नए विभाग के विकास का कार्यारंभ हुआ ।
  • अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर सी. एन. आर. रावने “वैज्ञानिक सचेतनता वर्ष” के आयोजन मंच से २४६९ छात्रों को संबोधित किया । प्रोफ़ेसर रावने इस से पहले रा. वि. सं. प. द्वारा विकसित आभाषीय रसायनशास्त्र” (वर्चुअलकेमिस्ट्री) पर बने मल्टीमीडिया सॉफ़्टवेयर का भी उद्घाटन किया।
  • अक्तूबर, २००५ में दो नई प्रदर्शनियों “जायन्ट इन्सेक्ट्स ” और ” मिरर मैजिक ” का शुभारंभ हुआ।
  • २४ जनवरी २००६ को अमेरिका के नासा के वैज्ञानिकों की एक टीम के द्वारा तैयार एक लोकप्रिय व्याख्यान सुनाया गया, इसका शीर्षक था – “मंगल पर दो वर्ष: उत्साह और सुअवसर की अविश्वसनीय कहानी” ।
  • ४ जुलाई, २००६ केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री, श्रीमती अंबिका सोनी ने डायनामोशन तथा स्पेस ओडिसी की इमारतों नव-उन्नत प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया।
  • “वर्ल्ड ऑफ़ इल्यूज़न्स” नामक एक नई प्रदर्शनी को शुरू किया गया।
  • “पावर ऑफ़ टेन” नाम से एक प्रदर्शनी को चालू किया गया,  जिस में विश्व की ४३ लघुत्तम और वृहत्तम चीज़ों की जानकारी थी ।
  • इन्हें दस के क्रम में ज़ूम इन और ज़ूम आउट अर्थात छोटा – बड़ा कर के देखा जा सकता था ११ दिसंबर २००७ को अमेरिका के मैरिलैंड यूनिवर्सिटी के निदेशक डॉ. रिचार्ड. बर्गने “ध्वनि एवं प्रकाश” पर व्याख्यान दिया।
  • १३ दिसंबर, २००७ को न्यूयॉर्क, अमेरिका के कोरंट इन्स्टिट्यूट ऑफ़ मैथेमेटिकल साइंस के प्रोफ़ेसर एस. आर. श्रीनिवासवर्धन, जो २००७ में नोबेल सम्मान से पुरस्कृत पहले भारतीय हैं, ने “हिस्ट्री ऑफ़ प्रोबेबलिटी थ्योरी” (संभाव्यतासिद्धांत का इतिहास) विषय पर व्याख्यान दिया।
  • ६ दिसंबर, २००८ को केन्द्रीय संस्कृति मंत्री श्रीमती अंबिका सोनी ने पृथ्वी से संबंधित एक स्थायी प्रदर्शनी – ’अर्थ एक्सप्लोरेशन हॉल’ का उद्घाटन किया ।
  • प्रोफ़ेसर सी. एन. रावने “मीट द साइंटिस्ट” कार्यक्रम में व्याख्यान दिया।
  • अमेरिका के मोन्टानास्टेट यूनिवर्सिटी के भौतिकी के रिसर्च प्रोफ़ेसर डॉ. लॉरेन डब्ल्यू. एक्टनने २४ फ़रवरी २००९ को आयोजित “मीट द एस्ट्रोनॉट” कार्यकम में व्याख्यान दिया।
  • विज्ञान नगरी के मुख्य द्वार संकुल में टिकट प्लाज़ा को उन्नत बनाने का कार्यारंभ हुआ।
  • १६ जनवरी, २०१० को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने विज्ञान नगरी के मेन अडिटोरियम में आयोजित एक समारोह के बाद विज्ञान नगरी के उन्नति करण के दूसरे चरण की आधारशिला रखी, जिसमें “साइंस एक्सप्लोरेशन हॉल” का निर्माण होना था ।
  • डायनामोशन हॉल के बटरफ़्लाइ कॉर्नर में एक ’वाक-थ्रू’ को विकसित करने का कार्य शुरू हुआ।
  • जर्मनी की गॉटीन्जन यूनिवर्सिटी के इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री (अकार्बनिक रसायन शास्त्र) विभाग के प्रोफ़ेसर एच. डब्ल्यू. रोएस्कीने “रसायन जिज्ञासा” पर व्याख्यान दिया ।
  • नव निर्मित’ साइंस एक्सप्लोरेसन हॉल’ के लिए नई प्रदर्शनियों की परिकल्पना औ योजना का कार्य शुरू हुआ।
  • गेट कॉम्पलेक्स के नए टिकट प्लाज़ा का निर्माण कार्य संपूर्ण हुआ।
  • ५नवंबर, २०११ को विद्यार्थियों तथा दर्शकों द्वारा स्वयं भाग ले सकने वाले एक अत्याधुनिक नैनो प्रयोगशाला की शुरुआत हुई ।
  • भारत सरकार की माननीय संस्कृति, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्री ने उस दिन इस स्थानका दौरा किया। रा.वि.सं.प. ने कोलकाता में संस्कृति मंत्रालय के अधीनस्थ सभी सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ मिलकर ९ मई, २०११ को विज्ञान नगरी के मुख्य सभागृह में कविगुरू रवीन्द्रनाथ ठाकुर की १५० वीं जयंती के अवसर पर एक सांस्कृतिक अनुष्ठान का आयोजन किया।
  • लग भग २,२०० लोगों ने इस कार्यक्रम का आनंद लिया।२ अगस्त, २०११ को आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय की १५० वीं जयंती के अवसर पर “मानव कल्याण में रसायन शास्त्र” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
  • २३ से २९ मार्च २०१२ तक “प्लैनेट अंडर प्रेशर” नामक एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ।
  • नव निर्मित ’साइंस एक्सप्लोरेशन हॉल’ में प्रदर्शित किए जाने वाले नए विषयों का कार्य संपूर्ण हुआ और इनके डिज़ाइन का कार्यारंभ हुआ।
  • ३ मई २०१२ को नासा की भूतपूर्व अंतरीक्ष यात्री सुश्री मार्शाइविनने एक समारोह में अपनी उड़ान से जुड़े अनुभव साझा किए ।
  • इस समारोह में १००० से अधिक विद्यार्थियों ने शिरकत की। अमेरिका की आयोवा यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर ईववर्टेलने २७ नवंबर २०१२ को लोक प्रिय विज्ञान व्याख्यान दिया, जिसका विषय था ’पौधे कैसे औषधि बनाते हैं’।
  • नई प्रदर्शनी की सजावट का कार्य पूरा हुआ।
  • जिस इमारत में’ साइंस एक्सप्लोरेशन हॉल’ बनना था, उसका निर्माण कार्य पूरा हुआ।
  • राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् ने विज्ञान नगरी के मुख्य सभागृह में २ अप्रैल २०१३ को अमेरिका की संस्था नासा से जुड़ी भारतीय मूल की अमरीकी अंतरीक्ष यात्री कमांडर सुनीता विलियम्स द्वारा एक लोक प्रिय व्याख्यान का आयोजन किया, जिसका शीर्ष कथा “एक्सपेडिशन ३३ इंटर्नेशनल स्पेसस्टेशन मिशन: चुनौतियाँ और सफलता” । लग भग २००० विद्यार्थियों तथा आम लोग इस व्याख्यान में उपस्थित थे।
  • एक ’डिजीटल पैनोरमा’ की स्थापना, जाँच एवं कमीशनिंग के कार्य की अनुमति दी गई । इसके तहत साइंस एक्स्प्लोरेशन हॉल में मानव विकास की कहानी को दर्शाया जायेगा । सम्पूर्ण हो जाने पर, यह भारत में अपनी तरह का पहला कार्य होगा।